वन विभाग में दबाई जा रही हैं भ्रष्टाचार की फाइलें




स्थानीय लोगों को इस बात की भनक तक नहीं है कि उनके इलाक़े के विकास के लिए केंद्र सरकार ने इतनी बड़ी धनराशि जारी की थी. कभी बुंदेलखंड के 41 फीसदी हिस्से पर घने जंगल हुआ करते थे। आज हरियाली सिमट कर 10 से 13 प्रतिशत तक रह गई है। ठेकेदारों ने जमकर जंगल उजाड़ें और सरकारी महकमे ने कागजो में पेड़ लगाये।
(पवन घुवारा)
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश में बुन्देलखण्ड के लिए विशेष पैकेज के तहत केन्द्र सरकार ने कई सौ करोड़ रूपये दिए। लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने विकास कार्यों पर पानी फेर डाला। वनविभाग ने तो बिना किसी तकनीकी हाथ और स्वीकृति तथा मूल्यांकन के करोड़ो रूपये पानी की तरह डकार लिये। हुये भारी भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें सत्ता केन्द्र भोपाल में दबी पड़ी हैं। बिना स्वीकृत लेबर बजट के फर्जी लेबर बजट से कई माह तक काम स्वीकृत किये जाते रहे। हालांकि बुंदेलखंड पैकेज में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार में अभी तक छोटी मछलियां समझी जाने वाले मात्र छोटे कर्मचारियों, अफसरों, निर्माण एजेंसियों पर ही कार्रवाई हो सकी। 

बुंदेलखंड पैकेज से अलग-अलग कार्यों के लिए स्वीकृत राशि, वित्तीय व भौतिक टारगेट और उपलब्धि की पड़ताल की तो यह हकीकत उजागर हुई। बुंदेलखंड पैकेज का एक और हिस्सा वन विभाग, पशुपालन विभाग के लिए दिया गया था, जिसे जंगलों में जलस्त्रोत, इनके विकास व पशुपालन पर खर्च किया गया है। इन कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार उजागर हो चुका है। करोड़ों रुपए की राशि की बंदरबाट होने के बाद भी अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है। बुंदेलखंड पैकेज राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय रहा है।
वन विभाग को इसके लिए बड़ी धनराशि मुहैया कराई गई, लेकिन चेक डैम की जगह महज़ पत्थर रखकर खानापूर्ति कर दी गई. पेड़ लगाने की बात तो छोड़ ही दीजिए।
स्थानीय लोगों को इस बात की भनक तक नहीं है कि उनके इलाक़े के विकास के लिए केंद्र सरकार ने इतनी बड़ी धनराशि जारी की थी. कभी बुंदेलखंड के 41 फीसदी हिस्से पर घने जंगल हुआ करते थे। आज हरियाली सिमट कर 10 से 13 प्रतिशत तक रह गई है। ठेकेदारों ने जमकर जंगल उजाड़ें और सरकारी महकमे ने कागजो में पेड़ लगाये।बुंदेलखंड पैकेज में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले समाजसेवी पवन घुवारा हाईकोर्ट तक गए। हाईकोर्ट के आदेश पर जांच हुई। घुवारा का आरोप है कि मप्र में 3700 करोड़ रुपए के पैकेज में 80 फीसदी से ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ है। जनता को कोई फायदा नहीं मिला। देश में पहली बार किसी पिछड़े क्षेत्र के लिए पैकेज दिया। ऐसा रहा तो अब भविष्य में ऐसा पैेकेज किसी को मिलने वाला नहीं है।


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