मैं तेरी बज़्म में ..



- चित्रा भारद्वाज "सुमन"


मैं काग़जों के समन्दर झिंझोड़ जाऊंगी
यूँ हर्फ़ हर्फ़ में दिल को निचोड़ जाऊंगी ।
तुम्हारे लम्स ने जोगन बना दिया है मुझे
तुम्हारी धुन पे ही पाजे़ब तोड़ जाऊंगी । कलामे जीस्त तेरे नाम आख़िरी करके मैं तेरी बज़्म में तन्हाई छोड़ जाऊंगी । लबों पे ठहरा है दरिया ए तिश्नगी कब से बना के अश्क़ निगाहों में मोड़ जाऊंगी । हर एक दर्द मुझे डूब कर पढ़ेगा "सुमन" किताबे इश्क़ में वो बाब जोड़ जाऊंगी ।

लम्स - छुअन , स्पर्श, तिश्नगी - प्यास, बाब - अध्याय, जीस्त - जिन्दगी

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