कलेक्टर नवनीत मोहन कोठारी पर 25 हजार का जुर्माना

सूचना का अधिकार अधिनियम


मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग का आदेश
जानकारी उपलब्ध न कराने पर मिली सजा
बालाघाट। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहला मामला है, जब मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने किसी आईएएस अफसर पर इतनी बड़ी पेनाल्टी अधिरोपित की है। बालाघाट के तत्कालीन कलेक्टर डॉ. नवनीत मोहन कोठारी पर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदकों को चाही गई जानकारी समय पर उपलब्ध न करवा पाए, के लिए 25 हजार रूपये की पेनाल्टी लगाई है।
इसी के साथ न्याय में देरी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है. आवेदक का मानना है कि आयोग ने भी इस मामले की सुनवाई में ढिलाई बरती और जिस अपील का निराकरण अधिक से अधिक तीन वर्षो में हो जाना था। उसमें सात वर्ष लगा दिये। हालांकि अब आयोग ने सख्ती दिखाते हुए एक आईएएस अफसर पर 25 हजार रूपये की पेनाल्टी लगाई है। इससे उन अधिकारियों के बीच यह संदेश जरूर जायेगा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का भली-भांति पालन करते हुए आवेदकों को चाही गई जानकारी समय पर उपलब्ध करवाये अन्यथा वे भी पेनाल्टी के भागीदार बन सकते हैं। 
शासन ने मनरेगा (तत समय नरेगा) के कार्यो को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को वाहन सुविधा उपलब्ध करवाई थी। जो किराये पर लिये जाते थे। इसी क्रम में जिला पंचायत ने नरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं तत्कालीन कलेक्टर डॉ. नवनीत मोहन कोठारी को चार वाहन उपलब्ध करवाये थे। जिसका उपयोग नरेगा के कार्यो में किया जाना था और बकायदा वाहनों की लॉग बुक संधारित करना था, परंतु ऐसा न होकर आबंटित वाहनों का दुरूपयोग किया जा रहा था, जिसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदक अशोक मोटवानी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक आवेदन 26 जुलाई 2010 को कार्यालय कलेक्टर में देकर उपरोक्त वाहनों के लॉग बुक की छायाप्रति मांगी थी। जिसे 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराया जाना था लेकिन संबंधित लोक सूचना अधिकारी ने न समय पर जानकारी दी और न ही कोई पत्र व्यवहार किया। जिससे व्यथित होकर आवेदक ने 7 सितंबर 2010 को कलेक्टर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी से अधिनियम की धारा 19 (1) के तहत अपील करते हुए वांछित जानकारी निःशुल्क दिलाने का निवेदन किया था, परंतु इस प्रथम अपील पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। तब आवेदक ने 9 नवंबर 2010 को राज्य सूचना आयोग को द्वितीय अपील करते हुए दोषी अधिकारी पर कार्यवाही करने एवं वांछित जानकारी दिलाने का अनुरोध किया था। 
इस द्वितीय अपील को लेकर माननीय आयोग ने लगभग तीन वर्षो तक कार्यालय कलेक्टर एवं कार्यालय जिला पंचायत के लोक सूचना अधिकारियों को नोटिस जारी किये लेकिन कोई संतोषजनक जवाब आयोग को नहीं मिलने से आयोग ने सख्ती दिखाते हुए कमिश्नर जबलपुर संभाग को पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए कार्यवाही के निर्देश दिये थे, लेकिन कमिश्नर कार्यालय ने भी गोल-मोल जवाब आयोग को दिये। तत्पश्चात आयोग ने सख्ती दिखाते हुए सभी संबंधित अधिकारियों पर 25-25 हजार रूपये की शास्ति आरोपित करने का कड़ा पत्र लिखते हुए आगामी पेशी में उपस्थित होने के आदेश जारी किये। इस दौरान संबंधित अधिकारी उपस्थित तो हुए लेकिन अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगते रहे। इस तरह द्वितीय अपील आवेदन को 6 वर्ष गुजर गये। 
आवेदक ने अपील निराकरण में हो रही देरी को लेकर माननीय आयोग से जल्द सुनवाई किये जाने का निवेदन किया। तब कहीं जाकर 30 मई 2017 को अंतिम सुनवाई हुई। जिसमें दोनो पक्ष उपस्थित हुए। तत्कालीन कलेक्टर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने अपने जवाब में गलत जानकारी आयोग को दी। उन्होंने जवाब में लिखा कि उनका स्थानांतरण 14 अप्रैल 2010 को हो गया था और आवेदक का आवेदन उनके स्थानांतरण के बाद प्रस्तुत हुआ है, जबकि आयोग ने कमिश्नर जबलपुर संभाग से जो जानकारी प्राप्त की उसके मुताबिक कलेक्टर डॉ. कोठारी 14 अप्रैल 2009 से 15 अप्रैल 2011 तक बालाघाट कलेक्टर रहे। साथ ही कलेक्टर डॉ. कोठारी ने इस मामले में आवेदक को ही दोषी ठहराते हुए उल्लेख किया कि आवेदक ने भ्रामक जानकारी मांगी है, जिसे ढूंढने में आयोग, शासन एवं सभी अधिकारियों का मूल्यवान समय एवं संसाधन व्यर्थ में व्यय हुए है। जिसके लिए श्री मोटवानी के ऊपर कार्यवाही किया जाना उचित होगा। 
आयोग ने डॉ. नवनीत मोहन कोठारी द्वारा प्रस्तुत इस जवाब को संतोषजनक न मानते हुए तथा अपील की कुल अवधि 6 साल 10 माह तक आवेदक को जानकारी उपलब्ध न कराये जाने का दोषी मानते हुए अधिनियम की धारा 5 (5) के तहत यह आदेश पारित किया कि अधिनियम की धारा 20 (1) में रूपये 250 प्रतिदिन शास्ति का प्रावधान है जबकि इस प्रकरण में लगभग 6 वर्ष 10 माह की देरी हुई है। अतएव अधिकत्तम शास्ति रूपये 25 हजार अधिरोपित की जाती है। जिसे एक माह के भीतर आयोग में जमा कर आयोग को पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें अन्यथा अधिनियम के अनुसार वसुली की कार्यवाही की जायेगी। 

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