...तो किसानों को बड़ी सौगात मिलेगी


- राम कस्तूरे, भोपाल 
किसानों के लिए कृषि भूमि का खसरा, नक्शा और किश्तबंदी महत्वपूर्ण दस्तावेज है, बैंक से KCC बनाना हो, किसी बैंक या सोसायटी से ऋण, खाद बीज या कृषि विभाग की किसी योजना का लाभ लेना हो यह एक सर्वमान्य अभिलेख है. बिना इसके किसान कुछ भी नहीं कर सकता. कुल मिलाकर यह किसानो के रोज के काम आने वाला यह प्रपत्र है. किन्तु इसे प्राप्त करने के लिए किसानो को तहसील आफिस के चक्कर लगाने पड़ते है, 
लोक सेवा केंद्र जाकर रसीद कटाना पड़ता है कुल मिलकर हर बार इस दस्तावेज को प्राप्त करने के लिए रु 300 से 400 का व्यय करना पड़ता है. यदि तुरंत चाहिए हो दक्षिणा भी देनी होती है. यदि साल में इस अभिलेख का 5-6 बार काम पड़ा तो राशी रु 2000 के ऊपर जाती है. लोक सेवा प्रबंधन की स्थापना के पहिले पटवारी रु 50-60 में यह काम तुरंत हो जाता था, लोक सेवा केंद्र के स्थापना के प्रति सरकार की नियत में कोई खोट नहीं थी इस केंद्र में काम करने वाले अधिकारियो और कर्मचारियों ने सरकार की छवि को ख़राब कर दिया. 
किसी भी अभिलेखकी नक़ल के लिए बिना चढ़ावे के कोई काम नहीं होता सरकार को इस दिशा में विचार करना आज प्रासंगिक है. 
सरकार ने करोडो रूपये खर्च कर #MPBHUABHILEKH की वेबसाईट बनाकर करोडो रूपये जनता के व्यय किये है, इस साईट से खसरा, नक्शा किश्तबंदी को निकाला जा सकता है किन्तु इसे किसी भी कार्यालय में मान्यता नहीं है केवल इस साईट का दस्तावेज किसानो के अवलोकनार्थ मात्र है. 

मैं कहना चाहता हूँ कि क्या इस साईट पर दिए गए अभिलेख गलत है या इनमे कुछ खामी है यदि ऐसा है तो जनता को भ्रम में क्यों रखा जा रहा है. यह ऑनलाइन साईट है इसमें डाले गए समस्त अभिलेखों को मान्यता दे दी जाए तो किसानो को बड़ी सौगात मिलेगी.
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News Digital India 18

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