छोरियां के बिना कुछ नहीं



- डॉ सुलक्षणा अहलावत


आपणै भीतर की लक्ष्मी बाई इब जगानी होगी, आपणी कमजोरी आपणी ताकत बनानी होगी। लड़नी होगी आपणै हकां की लड़ाई समाज तै, दोगले समाज को ताकत हामनै दिखानी होगी। चूल्हे चौके तलक ऐ नहीं साँ सीमित हाम आज, रच के नया इतिहास छाप या खुद मिटानी होगी। दुनिया की शुरुआत और अंत दोनों म्हारै तै सँ, या बात हामनै इस दुनिया ताहीं समझानी होगी। छोरै की चाह म्ह क्यूँ आपणा वजूद मिटावां हाम, छोरियां के बिना कुछ नहीं बात या बतानी होगी। बाहणों या लड़ाई म्हारी स हामनै ऐ लड़नी होगी, दोगले समाज की या अक्ल ठिकाने ल्यानी होगी। सारी जगांह बोलबाला स म्हारा आँख खोल देखो, आधी दुनिया झुकी म्हारै आगे आधी झुकानी होगी। फूलां सी नाजुकता छोड़ अंगारा सा दहकना होगा, सुलक्षणा की ढ़ालां कलम तलवार इब ठानी होगी।

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