क्या पुलिस वाकई अविश्वसनीय और राक्षस समान है?


- प्रहलाद सिंह सिसोदिया
मन्दसौर, पुलिस


आप पुलिस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते, आपको शुरू से पुलिस को राक्षस के समान बताया गया बस कुछ भी हो पुलिस गलत करेगी, क्योकि आपके पूर्वजों ने ऐसी ही पुलिस देखी थी, पर वो परतन्त्र भारत की थी। इतना सब होने के बाद आप सफर के दौरान चौराहे पर खड़े पुलिस वाले से ही इतना विश्वास के साथ ये कैसे पूछ सकते हैं कि " साहब फलाने जगह का रास्ता किधर है?" 
ज सुबह में ड्यूटी जाने हेतु बस में चढ़ रहा था, चूँकि सुबह का समय था बस में कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट की काफी भीड़ थी, चढ़ते वक़्त भीड़ होने से में फाटक से अंदर जाने की कोशिश में लगा था, तभी एक स्टूडेंट कहता है "आ जाओ सर, आप आर्मी वाले होते तो सेल्यूट मार देता।"
"विपक्ष का मुद्दा है भाई,उनकी लड़ाई हमारे दुश्मनों से है और हमारी अपनों से" मैने मुस्कुराते हुए जवाब दिया...।
मेने स्वीकार कर लिया था कि उस स्टूडेंट के मन में पुलिस के प्रति सम्मान नही बस एक तुच्छ नजरिया है, डर तो बिलकुल नहीं, क्योकि उसका जवाब ही ऐसा था। "हम भी नही चाहते लोग पुलिस से डरें, पर आपको पुलिस से डरना या गलत समझना किसने सिखाया?"
शुरुआत आपके घर से हुई थी, जब आपके पापा-मम्मी ने आपकी बचपन की शरारतों से तंग आकर पुलिस का डर दिखलाया होगा, या फिर कहि सफर में सामने बैठे पुलिस वाले को दिखाकर पुरे सफर में आपको शांत बिठा दिया होगा, लेकिन उससे पहले उस पुलिस वाले ने आपको देखकर मुस्कुराया था, जिसका आपको ध्यान नही रहा।
सबसे ज्यादा आपको पुलिस से समस्या ट्रैफिक पुलिस के चालान से होती है और हो भी क्यों न, क्योकि आप तो सही हो, फिर पुलिस क्यों गलत चालान बना देती है, पर शायद यहा भी आप को गलत साबित होना पड़ता है, क्योकि संविधान ये अपेक्षा करता है कि हर नागरिक को कानून का ज्ञान हो, पर ये जिम्मेदारी पुलिस की नही, उसे तो बस पालन करवाने के लिए रखा है।
कल आपने पुलिस को आपके किसी नजदीकी को पकड़ते देखा क्योकि उस पर शराब पीकर वाहन चलाने का आरोप था , पर आपका मन उसको गलत नही मान रहा था, गलत बस पुलिस थी। अगले दिन रोड दुर्घटना में आपके किसी परिचित की मृत्यु हो जाती है क्योंकि सामने वाला शराब पीकर गाड़ी चला रहा था, फिर भी आपका मन ये मानने को तैयार नही था कि पुलिस ऐसे शराबियो के खिलाप कार्यवाही नही करती।
आप पुलिस पर बिल्कुल विश्वास नही करते, आपको शुरू से पुलिस को राक्षस के समान बताया गया बस कुछ भी हो पुलिस गलत करेगी, क्योकि आपके पूर्वजो ने ऐसी ही पुलिस देखि थी पर वो परतन्त्र भारत की थी।
इतना सब होने के बाद आप सफर के दौरान चौराहे पर खड़े पुलिस वाले से ही इतना विश्वास के साथ ये कैसे पूछ सकते है कि " साहब फलाने जगह का रास्ता किधर है।"  कैसे आप बैंक में नोट बदलवाते हुए, ड्यूटी पर लगे पुलिस वाले से बैंक के सम्बन्ध में सही जानकारी की आस करते है!! सरकारी ऑफिस के चक्कर लगा लगा कर परेशान होने के बाद भी आप उसे "सरकारी काम है, ऐसे ही होगा" बोल देते है पर पुलिस थाने पर पूरी उम्मीद से की काम जल्दी और सही होगा का विश्वास करते है!! ये विश्वास शायद आपके मन में होगा पर दिमाग आपका इसे हावी नही होने देता, जो की बस आपके साथ कुछ गलत होने का अंदेशा होने से पहले ही आपको ये सूचित कर देता है कि बस आपको अब पुलिस ही बचा सकती है या मदद कर सकती है, पर आपके साथ कुछ गलत हो जाने के बाद चाहे पुलिस कितनी मदद कर दे आप का दिमाग ये मान ही नही सकता कि पुलिस अच्छी है।
पर क्या उफनते हुए नाले पर खड़े पुलिस जवान ने आपको ये सुचना नही दी थी की आगे खतरा है जो आप उससे लड़ने जा भिडे, शाम को घर जाने की जल्दी में आप चौराहे पर जिससे बहस करते हो क्या आपको पता है कि सारा ट्रैफिक समाप्त होने के बाद उसे कितने दूर अपने सोते हुए बच्चो का चेहरा देखने जाना है और सुबह आपके घर से निकलने से पहले 70 km दूर से आकर आपको बिना अव्यवस्था के ऑफिस पहुचाना है।
एक दिन आप जब घर से निकले तो जहाँ आपको पुलिस जवान दिखाई दे बस एक बार उसकी तरफ देखते जाना कि वो क्या कर रहा है, कौन से चौराहे पर खड़ा है, किस समय खड़ा है और कौन से त्यौहार पर, और जब आप ऐसा दिन भर में करते रहेंगे तो पाएंगे कि वो पुलिस वाला कई रूप ले चुका होगा।
कही चौराहे पर, फिर जुलुस, प्रदर्शन, धरना, ज्ञापन और फिर शाम को आपके घर जाने के बाद भी और हो सकता है रात्री में जो गश्त सिटी बज रही है वो भी उसी के मुख से बज रही हो।
पुलिस दिमाग से कानून की रखवाली होती है, पर वर्दी के अंदर मन वही रहता है, अगर पुलिस ने कुछ व्यवस्थाएं बनायी है तो वो आप सभी की सहूलियत के लिए ही है, एक पुलिस वाला भी चाहता है कि दर्शन के लिए लगी लाइन जल्दी और सहूलियत से समाप्त हो पर बिना आपके सहयोग के मुश्किल है, वो ये भी चाहता है कि पार्किंग स्थल पर कोई जाम न लगे और सभी जल्दी निकल जाए पर आपके सहयोग बिना मुश्किल है। देश बनाने में जो सहयोग दे रहे है, पर बिना कानून का पालन किये....कैसे? आप कानून का पालन कीजिये, एक पुलिस जवान की बात बिना बहस किये मान लीजिए फिर क्या नही होगा जो आप चाहते है...
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News Digital India 18

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