लोक सेवा केंद्र पांढुर्ना में ठगा जा रहा है भोली जनता को



सौंसर में खसरा खतौनी की रसीद एक साथ काटकर 75/- लिए जा रहे हैं वहीँ पांढुरना अलग अलग 55/- की रसीद काट कर 110/- लिए जा रहे हैं देखें नीचे चित्र में 

जानकारी के अभाव में जनता हो रही प्रताड़ित
(पांढुरना से तेजस सूरजूसे)

छिंदवाड़ा
 जिले की तहसील पांढुर्ना में जानबूझ कर जनता से ठगी हो रही है तहसील पांढुर्ना में लोक सेवा केंद्र पांढुर्ना में एक साल का चालू खसरा एवँ बी-1 खतौनी की प्रतिलिपियों का एक साथ प्रदाय नवीन हेतु कोई गरीब किसान आवेदन करता है तो उस गरीब व्यक्ति से 55 रुपये का खसरा रसीद और 55 रुपये की किश्तबंदी रसीद अलग-अलग काटी जाकर कुल 110 रुपये लिये जा रहे हैं, जब मैं तेजस सुरजूसे पांढुर्ना के पास के कुछ वाड़ेगाव से लोगों जाकर मिला और इस बात की जानकारी देते हुये बात की तो  कहने लगे कि खसरा किश्तबंदी की रसीद रसीद सौसर में 75 रुपये की काटी जाती है तो मैंने अपने स्तर से छिंदवाड़ा की सभी तहसील चौरई, हर्रई,चाँद, सौंसर, छिंदवाड़ा से इस बारे में डेटा कलेक्ट किया, जिसके अनुसार पुख़्ता प्रमाण आपके सामने हैं, जिसके बाद इन सभी प्रमाणों को लेकर तहसीलदार मैडम सुश्री ज्योति ठोके के पास गया तो मैडम ने भी लोकसेवा पांढुर्ना को दिखाये गये तथ्यों के आधार पर आगे से 55+55=110 की जगह सिर्फ 75 की रसीद काटने व् खसरा एवँ खतौनी दोनों प्रति की एक साथ प्रतिलिपियों को प्रदान करने को आदेशित किया लेकिन आदेश का कोई पालन न करते हुए आज भी 110 ही लिये जा रहे हैं।
लोक सेवा पांढुर्ना के कर्मचारी उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना करके अपनी मनमर्जी से गरीब व्यक्तियो से 35 रुपये अधिक लेकर ठग रहे है, अब आगे कार्यवाही करने जाओ तो कुछ लोक सेवा केंद्र पांढुर्ना का जवाब होता है कि हमारे नियम अलग हैं हम से 55 रुपये खसरा व 55 किश्तबन्दी के इस प्रकार कुल 110 रुपये ही लगेँगे, ऐसा जवाब इनका है तो क्या वो सभी दस्तावेज  झूठे है जो छिंदवाड़ा जिले की अन्य तहसीलों से भी लिये गये हैं.,, मेरी प्यारी भोली जनता अब आप बताओ गलती किसकी हैं, मेरा यह कहना है कि हर बात की शिकायत स्वरुप कंप्लेंट करने जाऊ तो अधिकारी सुधार करने की जगह उलटा कंप्लेंट कर्ता को आदतन समझ कर कोई ध्यान नही देते हैं ऐसी स्थिति के बारे में ही शिकायत करने के पहले अपना सिस्टम क्यों नही सुधारा जाता हैं, हमे बार-बार शिकायत का आदतन करने को मजबूर क्यों किया जाता हैं और तहसील कार्यालय पांढुर्ना में यदि कोई नकल आवेदन लेकर जाता है तो आवेदन श्रीमती अलका कोल्हे को दिया जाता हैं वो गरीबो को रसीद नही प्रदान करती है, उनसे रुपये लेकर जनता को ठग रही हैं और जनता से रुपये लेकर चुप बैठी रहती हैं क्या यह सही है इतनी घूसखोरी अंदर ही चल रही है लेकिन कोई एक्शन नही, और ना ही इन्हें किसी का भय हैं, उल्टा जवाब मिलता हैं कि हमारा कुछ नही हो सकता ऐसा ही बर्ताव देख अन्य न्यू भर्ती में आये कर्मचारियों के भी हौसले बढ़ने लगते है और वो भी.........
क्या करें ऐसी ही स्थिति यदि रही तो न्याय की श्रेणी से जनता का भरोसा उठ जायेंगा मेरे द्वारा कहे गये सभी शब्दों के प्रमाणीकरण सबूत हैं जिसमे पांढुर्ना के दस्तावेज और छिंदवाड़ा क्षेत्र की तहसीलों से प्राप्त दस्तावेज है ऐसे कर्मचारी जो जनता का शोषण करते हैं और जनता को ठगते हैं। इन पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये।



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