की बन जोगण तेरे रँग में फिर..

सुनो न की छाँव बन खिल जाओ मेरे आँगन के अमलताश से पीले फूलों की तरह.. - सुरेखा अग्रवाल, लखनऊ  यादों के अंतिम छोर से मेरे व...
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देवर हो या जेठ सभी को लाल-पीला, हरा-गुलाबी कर देती हैं, रंग-गुलाल में लबरेज यहाँ की महिलायें

'आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया.. बड़ झोली रे रसिया..'' अपने अपने घर से निकली कोई गोरी, कोई काली रे रसिया ...
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बीजेपी ने चुनाव से पहले ही 5 सीट हार लीं

''बिहार में बीजेपी चुनाव से पहले ही 5 सीट गंबा दी है. अब वह वहां 17 सीट पर ही चुनाव लड़ रही है. सब भी जीत लेती है तब भी 5 स...
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सीएजी रिपोर्ट, स्मृति ईरानी ने गोद लेने के नाम पर गांव को मिलने वाला पैसा जेब के अंदर किया?

''देश की रखवाली जैसा वचन लेने वाले ट्रेंड '#मैं भी चौकीदार' के तहत अपने नाम के आगे ''चौकीदार''...
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'मुझे नरेंद्र मोदी नापसंद है', उनके लिए, जो पूछते हैं कि नरेंद्र मोदी का विकल्प क्या है

''आप पूछिये कि नरेंद्र मोदी का विकल्प क्या है। तो मैं कहूंगा कि नरेंद्र मोदी मुझे नापसंद है। वह मेरे लिए आज विकल्प सूची मे...
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संज्ञाओं का अपहरण

- सुरेन्द्र रघुवंशी      जो देश की सीमाओं पर और भीतर भी देश की चौकीदारी रात-दिन कर रहे हैं  सीने पर गोली खाकर शहीद होकर भी ग...
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आज भी प्रासंगिक है अंग्रजी हुकूमत के खिलाफ निकलने वाले अखबार "गदर" का यह एक अंश

समस्या हिन्दू बनाम मुस्लिम की नहीं है, बल्कि शोषक बनाम शोषितों की है। "हम किसी भी धर्म, जाति, वर्ण के होने के पहले इंसान ...
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